छत्तीसगढ़ अब तक !!

March 10, 2019

आजाद भारत से कई साल पहले यानि सन 1918 में ही पंडित सुंदरलाल शर्मा जी, एक पृथक राज्य छत्तीसगढ़ की कल्पना कर चुके थे और इसके बाद से ही नए राज्य ‘छत्तीसगढ़’ की मांग, जो है जोर पकड़ने लगी थी| 1924 में पहला प्रस्ताव रायपुर जिला परिषद् की बैठक में लाया गया | 1939 में कांग्रेस की त्रिपुरी अधिवेशन में छत्तीसगढ़ की मांग रखी गयी |

14 जनवरी 1998 तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी जी का रायपुर आगमन हुआ | रायपुर के सप्रे मैदान में छत्तीसगढ़ के लोगो को सम्बोधित करते हुए अपने भाषण में कहा कि “आप मुझे 11 सांसद दो ,मै आपको छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा” | छत्तीसगढिया इस बात को सुन कर ऐसे प्रोत्साहित हुए और कई सारे बड़े नेता जैसे ठाकुर रामकृष्ण सिंह, खूबचंद बघेल, बैरिस्टर छेदीलाल, शंकर गुहा नियोगी , रविंद्र चौबे आदि लोगो के भरषक प्रयास के बाद आखिरकार सन 1998 में एक नया राज्य बनाने की सहमति हो ही गयी और इसका नाम रखा गया “छत्तीसगढ़” | यह नाम रखने का के पीछे भी एक लॉजिक है वो आप गूगल कर सकते है या आप छत्तीसगढ़ के इतिहास वाले सेक्शन में जा के पढ़ सकते है|

“छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया”

छत्तीसगढ़िया लोगो के लिए आखिरकार वो समय आ ही गया जिसका उनको बहुत बेसब्री से इंतजार था | दिन था बुधवार, सन 2000और दिनांक था 1 नवम्बर, मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ देश का 26वा राज्य बन गया| छत्तीसगढ़ में मानो दिवाली कुछ दिन पहले ही आ गयी थी सब तरफ एक ही नारा था “छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया “|

अब बात कर लेते है इस क्षेत्र के बारे में, कि आखिरकार क्या-क्या इस राज्य में है और जो आगे चलकर बहुत काम की चीज़े होनी वाली थी | इस पुरे क्षेत्र में धान की इतनी मात्रा में पैदावार होती है की अगर आप खेतो में घूम ले तो ऐसा लगता है की आप सोने की खान में बैठे हो | ऐसा हम इसलिए कह रहे क्योकि सुनहरी धान की बालिया आपको बिलकुल यही फीलिंग करायेगी| यहाँ कोयला, टिन, बाक्साइट, हीरा जैसे कई बहुमूल्य चीज़े है जो कि इस राज्य की एक अलग पहचान बनाती है| इस राज्य में धान की अधिक पैदावार होने के कारण ही इसे “धान का कटोरा ” कहा जाता है |

अब इस कड़ी से राजनितिक सफर की शुरुवात होने वाली है इस सेक्सन में हम मुख्यमंत्रियों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे | चलिए फिर किस बात की देरी है-

जंहा छत्तीसगढ़ के आम लोग नए राज्य बनने पर बहुत खुश थे वही राजनितिक पार्टियो के लिए एक अलग चैलेंज शुरू हो गया था | चैलेंज था चुनाव जितना और यहाँ की गद्दी में बैठना |

उस समय की कांग्रेस पार्टी आज की समय की कांग्रेस पार्टी से काफी मजबूत थी|यही से अब अजित जोगी की कहानी शुरु होती है| जब कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बनाने वाली थी तब उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी, की इस नयी नवेली राज्य का मुख्यमंत्री आखिर किसे बनाया जाये| तब एक नाम सामने आया और वो था अजित जोगी | आईये थोड़ा अजित जोगी की कहानी जानते है –

अजित जोगी –

अजित जोगी जिनका जन्म 29 अप्रैल 1946 में हुआ था| पढाई में अजित जी बहुत अव्वल थे उन्होंने इंजीनियरिंग की पढाई भोपाल के मौलाना आजाद कॉलेज से की थी| मेकनिकल इंजीनिरिंग में गोल्डमेडलिस्ट प्राप्त किया| फिर वह IPS बन गए और ठीक दो साल बाद IAS निकाल लिया | IAS बनने के बाद वह इंदौर में अपनी सर्विस कर रहे थे की अचानक…….

यहाँ तक अजित जोगी की लाइफ हम कह सकते है की सिंपल थी| पर उनके साथ बहुत बड़ा होने वाला था और वह सन 1985 से ही शुरू हो गया था। रात का समय था अचानक फ़ोन की घंटी बजती है फ़ोन करने वाला व्यक्ति था तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के PA का, नाम था वी जॉर्ज, थोड़ा रुकिए और सोचिये ऐसा क्या काम आ गया PA….

फ़ोन उठाया जाता है, PA कहते है कि – ” सोच लो,राजनीति में आना है या कलेक्टर ही रहना है | तुम्हारे पास ढाई घंटे का समय है सोच के बता देना ” | फिर क्या था कलेक्टर साहब अब कलेक्टर नहीं रहे वो बन चुके थे नेता | राजनीति की पारी जो है वो शुरू हो गयी थी | अजित जोगी धीरे -धीरे राजीव गाँधी के काफी करीब होते गए |अजित जोगी का दौर चल पड़ा था और जब 1993 में मध्यप्रदेश का चुनाव हुआ तो सीएम बनने की दावेदारी भी पेश कर चुके थे |लेकिन उस
समय बात बनी नहीं और म.प्र. का सीएम बने दिग्विजय सिंह ।

कुछ सालो के बाद भारत में सत्ता पलट हुई और प्रधानमंत्री बने श्री अटलबिहारी जी | बहुत दिनों से चल रही नए राज्य की मांग अटल जी ने पूरी कर दी | छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्य बनाये गए | जैसे ही छत्तीसगढ़ ,म.प्र. से अलग हुआ उसके साथ 90 विधायक भी अलग हो गए |

अब तक समझ ही चुके होंगे कि नया राज्य मतलब, सरकार भी बनायीं जाएगी, कई सारे मंत्री बनाये जायेंगे परन्तु सबसे बड़ी बात यह थी की सीएम कौंन बनेगा | उस समय सबसे बड़ी दावेदारी जिन्होंने पेश की थी उसका नाम था – विद्याचरण शुक्ल और मोतीलाल वोरा | ये दोनों उस समय द काफी बड़े राजनितिक दिग्गज थे | सीएम बनने के दौड़ में कही पार्टी को नुकसान न हो जाये इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा की छत्तीसगढ़ के ही लोग, एक आदिवासी सीएम चाहते है उनकी मांग को पूरा करो|

अब क्या था दोनों बड़े दिग्गज एक साथ ही क्लीन बोल्ड हो गये और मैदान में एक नए खिलाडी की एंट्री हुई नाम था अजित जोगी एक आदिवासी बैकग्राउंड से आने वाला नेता | आप सोच रहे होंगे की जोगी जीै आदिवासी है या नहीं ये तो अभी तक कन्फर्म नहीं है ? | तो हम आपको बता दे की सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चूका है और कोर्ट ने कहा है की अजित जोगी जी एक आदिवासी है |

और फाइनली अजित जोगी बन गए छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री || CMO CHHATTISGARH : अजित जोगी का एक कलेक्टर से मुख्यमंत्री बनने का सफर कहा जाये तो बड़ा अच्छा था| पर अब आगे क्या होगा ? अगला चुनाव आने को है क्या अजित जोगी चुनाव जी पाएंगे या नहीं ?

सन 2003 वक्त था छत्तीसगढ़ में चुनाव की गतिविधिया शुरू हो गयी| राजनितिक बुद्धिजीव प्रचार प्रसार में लग गए थे और चुनाव शुरू हो चूका था दो बड़ी राजनितिक पार्टिया जो आपस में टकराने वाली थी वह थी कांग्रेस और भाजपा | जब चुनाव का रिज़ल्ट तो कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी | अजित जोगी को सिर्फ 37 सीटे मिली और 50 सीटे मिली भाजपा को और इस प्रकार भाजपा की सरकार बनी |

रुकिए अभी कहानी ख़तम नहीं हुआ….. कुछ और चीज़े है जो अजित जोगी के बारे में जानना जरुरी है….

चलिए।>>> अजित जोगी का 2004 में एक्सीडेंट हो गया उनकी कार पेड़ से टकरा गयी और उनके पैरो लको लकवा मार दिया , तब से लेकर आज तक (यह आर्टिकल लिखे जाने तक) वह व्हीलचेयर के सहारे है | यहाँ से जोगी जी की परेशानिया बढ़ती जा रही थी, उन पर हत्या के आरोप लगे | दरसल एनसीपी नेता रामावतार जग्गी का रायपुर में हत्या कर दी गई जिसके चलते नेता रामावतार के बेटे सतीश जगी ने अजित जोगी के ऊपर हत्या का आरोप लगाया |इसके बाद एक और आरोप लगा झीरम घाटी कांड में जितने भी कांग्रेसिया नेता मरे गए थे, उसके हत्या का और ये आरोप लगाया था महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा का | फ़िलहाल ये बात अभी तक साफ़ नहीं हुई है |खैर आपको बता दे की अभी अजित जोगी की खुद की पार्टी है जिसका नाम है “छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ” |

इसके बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी अलग थलग हो गयी और आने वाले तीन चुनाव
2018 तक भाजपा ने जीते |


आगे की कहानी छत्तीसगढ़ के दूसरे सीएम की है जिसका सफर चाउर वाले बाबा से मोबाइल वाले बाबा और आगे का है| ++

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