छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास P2

October 16, 2018

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छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास

छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास कल्चुरियों के पतन के साथ शुरुवात होती है। इसी समय मराठो ने छत्तीसगढ़ में आक्रमण किया था और अपनी राज्य स्थापित किया था।

मराठा शासन ( 1741 – 1818 )

बिम्बाजी भोसले (1758 – 1787 )

छत्तीसगढ़ में प्रथम मराठा शासक बिम्बाजी भोसले थे। इनकी दो पत्निया थी- उमाबाई और आनंदीबाई। इन्होने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया। इन्होने छत्तीसगढ़ में परगना पद्धति की शुरुवात की थी।

परगना एक राजस्व प्रबंधन की पद्धति है। विट्ठलराव दिनकर ने इसे पुरे छत्तीसगढ़ में लागु करवाया। इस पद्धति के तहत छत्तीसगढ़ को 27 परगनो में बाँट दिया था। परगने का प्रमुख कमाविसदार कहलाता था।

इनकी सहायता के लिए बड़कारो की नियुक्ति की जाती थी। उस समय ग्राम का प्रमुख गोटियाँ हुआ करता था। उसकी सहायता के लिए कोतवाल और पटेल की नियुक्ति की जाती थी।

इन सभी का काम राजस्व वसूल करना था। बिम्बाजी ने अपने शासन काल में रायपुर के दूधाधारी मठ का जीर्णोध्दार तथा रामटेकरी मंदिर का निर्माण कराया। 1778 में इन्होने कोटपाड़ की संधि की।

व्यंकोजी भोसले (1787 – 1815 )

बिम्बाजी के बाद व्यंकोजी भोसले ने छत्तीसगढ़ में 1787 से 1815 तक राज किया। इन्ही के शासन काल के समय यूरोपीय यात्री फारेस्टर छत्तीसगढ़ आया था।

व्यंकोजी के शासन काल के समय में छत्तीसगढ़ में सूबा शासन की शुरुवात हुआ। इन्हे धुरंधर की उपधि दी गयी थी। इनका शासन काल उतना अच्छा नहीं रहा।

इसके काल में छत्तीसगढ़ की आर्थिक,सामाजिक और राजनैतिक तीनो क्षेत्र में दुर्दशा थी।

[ सूबा शासन ]

सूबा शासन एक शासन करने की पद्धति है। व्यंकोजी भोसले ने इस पद्धति की शुरुवात की थी। 1787 से 1818 तक छत्तीसगढ़ में इस पद्धति से शासन किया गया।

महीपतराव दिनकर 

महीपतराव दिनकर को छत्तीसगढ़ का पहला सूबेदार नियुक्त किया गया था। इन्होने 1787 से 1790 तक शासन किया। 1790 में ही यूरोपीय यात्री फारेस्टर छत्तीसगढ़ आया था।

विट्ठलराव दिनकर 

छत्तीसगढ़ का दूसरा सूबेदार। इन्होने पुरे छत्तीसगढ़ में परगना पद्धति लागु किया। परगना एक राजस्व प्रबंधन की पद्धति है। इस पद्धति के तहत छत्तीसगढ़ को 27 परगनो में बाँट दिया था। परगने का प्रमुख कमाविसदार कहलाता था।

इनकी सहायता के लिए बड़कारो की नियुक्ति की जाती थी। उस समय ग्राम का प्रमुख गोटियाँ हुआ करता था। उसकी सहायता के लिए कोतवाल और पटेल की नियुक्ति की जाती थी। यूरोपीय यात्री मिस्टर ब्लंट इसी समय छत्तीसगढ़ आया था।

केशव गोविंद 

केशव गोविंद 1797-1808 तक छत्तीसगढ़ का सूबेदार बना रहा। छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक समय तक सूबेदार रहा। यूरोपीय यात्री कोलब्रुक का आगमन इसी समय हुआ था।

बीकाजी गोपाल  

1809 से 1816 तक बीकाजी सूबेदार रहे थे। इन्ही के शासन काल के दौरान व्यंकोजी भोसले और रघुजी द्वितीय की मृत्यु हुई थी। ऐसी के समय मराठो और अंग्रेजो के बिच सहायक संधि हुई थी।

यादव राव दिनकर

1817 से 1818 तक यादव राव दिनकर सूबेदार रहे थे। यह सूबा शासन के अंतिम शासक थे।

[ ब्रिटिश के अधीन मराठा शासन ]

  • 1818 से 1830 तक मराठा शासन अंग्रेजो के अधीन रहा। 1818 में तृतीय आंग्ला-मराठा युद्ध में मराठा वंश पराजित हो गए थे। जिसके कारण छत्तीसगढ़ में मराठा शासन समाप्त हो गया था।
  • इस युद्ध के कारण ही छत्तीसगढ़ अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया था।
  • छत्तीसगढ़ के प्रथम ब्रिटिश अधीक्षक -कैप्टन एडमंड।
  • द्वितीय अधीक्षक- कैप्टन एगन्यू।
  • कैप्टन एगन्यू ने 1818 में राजधानी रतनपुर से रायपुर की थी।
  • गेंदसिंह का परलकोट विद्रोह इसी के समय हुआ था।
  • सोनाखान के जमींदार रामसाय का विद्रोह 1819 में हुआ था।
  • 1854 में छत्तीसगढ़ पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया।
  • छत्तीसगढ़ पर शासन करने हेतु एक डिप्टी कलेक्टर की नियुक्ति हुई जिसका नाम चार्ल्स सी इलियट था।
  • चार्ल्स सी इलियट के शासन काल 1854 में तीन तहसील बने -रायपुर, रतनपुर, धमतरी।
  • 1854 में रायपुर जेल बनवाया गया।
  • 1857 में तहसीलों की संख्या 5 कर दी गयी- धमधा, नवागढ़,रायपुर, धमतरी, रतनपुर।
  • ग्रेट ईस्टर्न रोड 1862 में बनाया गया जो नागपुर से सम्बलपुर तक था।
  • पुलिस प्रणाली 1862 में लागु किया गया।

सैंडिस ब्रिटिश-

1825 से 1828 तक सैंडिस ब्रिटिश अधीक्षक थे।
छत्तीसगढ़ में डाक और तार का विकास इन्होने ही कराया था।

पुनः भोसला शासन (1830 से 1854 )

रघुजी तृतीय ने पुनः छत्तीसगढ़ में अपना अधिपत्य जमाया। सन 1830 से 1853 तक शासन किया। 1853 में रघुजी तृतीय की मृत्यु हो गयी। और इसकी के साथ मराठा शासन का अंत हो गया।

इसके बाद डलहौजी ने “गोद प्रथा निषेध” की निति के तहत नागपुर रियासत का ब्रिटिश शासन में विलय कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ भी ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।

आधुनिक काल Part 2 पढ़ने के लिए यंहा क्लिक करे – Part-2 

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