जानलेवा वायरस जापानी इंसेफेलाइटिस अब भारत में

October 29, 2018

जापानी इंसेफेलाइटिस

मच्छर के काटने से मरेलिया होता है, यह तो आपने सुना होगा। परन्तु मच्छर के काटने से दिमागी बीमारी भी हो सकती है ये सुना है। चलिए हम आपको बताते है ऐसे खतरनाक वायरस के बारे में जो तेजी से फ़ैल रहा है।

यह एक घातक दिमागी बीमारी है जो मच्छरो से फ़ैल रही है। जिसका अभी (2018) तक कोई निश्चित इलाज नहीं है।

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस ?

इंसेफेलाइटिस को आमतौर पर दिमागी बुखार के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर दिमाग में सूजन हो जाता है जिससे दिमाग टिक से काम करना बंद कर देता है।

यह एक वायरल रोग है जो प्रमुख रूप से एशिया में फ़ैल रहा है। यह रोग विशेष रूप से नवजात शिशु और बच्चो को होता है। इसके वजह से विकलांगता जैसे बीमारी भी हो सकती है।

कहा और कैसे होता है इंसेफेलाइटिस ?

यह वायरस क्यूलैक्स मच्छर से फैलता है। यह मच्छर ग्रामीण चावल उत्पादन और सूअर पालन क्षेत्रो में पाया जाता है। संक्रमित जानवरो का खून चूसने से क्यूलैक्स मच्छर, वायरस से संक्रमित हो जाता है और जब यह मच्छर किसी इंसान को काटता है, तो वह इंसान भी वायरस से संक्रमित हो जाता है।

जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण ?

तेज भुखार, सिरदर्द जी मचलना, गर्दन में कठोरता, आलस्य नींद आना, चिड़चिड़ापन, कभी कभी तेज ऐठन,अचानक उक्ति होना, इसके लक्षण है।

नोट- संक्रमित होने के 5 -15 दिनों के अंदर लक्षण महसूस होने लगता है।

इस वायरस का शिकार प्रतिदिन बढ़ रहे है। पुरे एशिया में इसके प्रतिवर्ष 60000 से ज्यादा मामले दर्ज है। भारत में भी यह वायरस तेजी से फ़ैल रहा है। भारत के 19 राज्यों में यह वायरस से संक्रमित लोगो को पुष्टि की गयी है।

सबसे ज्यादा खतरा किस उम्र के लोगो को होता है?

यह वायरस ज्यादातर नवजात शिशु और 1 – 15 वर्ष के बच्चो को होता है जिसे यह मच्छर काट ले।

इसका वायरस का उपचार?

अभी तक इसका कोई विशेष दवा नहीं बनाई जा सकी है। परन्तु इसका टिका करने से इस रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।

कैसे बचे इस खतरनाक वायरस के शिकार होने में?
मच्छर युक्त क्षेत्रो से दूर रहकर।
रात में सोने के समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करके।
टीकाकरण करवा के इससे बचा जा सकता है।

मच्छरों से दूर रहिए सेफ रहिये !!

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