छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आंदोलन 

October 17, 2018

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की स्थापना के बाद यहाँ की राष्ट्रवादी गतिविधियाँ लगभग पुरे तरीके से कांग्रेस से जुड़ गई। फिर आगे चलकर इसी से संगठित हुई। सन 1891 के नागपुर अधिवेशन के समय छत्तीसगढ़ का सम्बन्ध कांग्रेस से हुआ। 1905 में नागपुर में आयोजित प्रथम प्रांतीय राजनीतिक परिषद् की बैठक में कांग्रेस की गतिविधियों का सीधा प्रभाव छत्तीसगढ़ पर पड़ा। 1906 में द्वितीय प्रांतीय राजनितिक परिषद् में दादा साहेब खापड़े का स्वदेशी आंदोलन प्रस्ताव को स्वकृति मिल गयी। इसी समय रायपुर में कांग्रेस शाखा की स्थापना हुई।

छ.ग. में होमरूल आंदोलन

1918 में रायपुर में होमरूल लीग का सम्मलेन आयोजित हुआ। पंडित रविशंकर शुक्ल यंहा के प्रमुख संगठन कर्ता करता थे। इसी समय तिलक रायपुर आये थे। छत्तीसगढ़ में कुंजबिहारी अग्निहोत्री, गजाधर साव, गोविन्द तिवारी, राघवेंद्र, बैरिस्टर छेदीलाल सिंह इस आंदोलन के अग्रदूत थे।

छ.ग. में रोलेट एक्ट का विरोध

रोलेट एक्ट का छत्तीसगढ़ में हड़ताल और सभाएँ द्वारा कानून का विरोध कर के किया गया।राजनंदगांव में प्यारेलाल सिंह के नेतृत्व में विरोध हुआ और बिलासपुर में ठाकुर छेदीलाल, ई. राघवेंद्र, शिव दुलारे के नेतृत्व में काले वस्त्र धारण करके रैली निकलकर विरोध किया।

छत्तीसगढ़ और असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन भारत का प्रथम राष्ट्रीय आंदोलन था। कंडेल नगर सत्याग्रह के रूप में छत्तीसगढ़ में यह आंदोलन शुरू हुआ। असहयोग आंदोलन के समय राघवेंद्र राव, ठाकुर प्यारे लाल सिंह आदि ने अपनी वकालत से त्यागपत्र दे दिया। यह आंदोलन 1920 – 1922 तक चला। पंडित सुंदरलाल शर्मा, पंडित रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह आदि ने इस आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस आंदोलन के समय राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना हुई। विदेशी कपड़ो का बहिष्कार हुआ। पुरे छत्तीसगढ़ में जगह -जगह प्रदर्शन हुए। सिहावा नगरी सत्याग्रह और मजदुर आंदोलन ,असहयोग आंदोलन का ही प्रभाव था। अंततः चौरा-चौरी कांड के बाद इस आंदोलन की समाप्ति हुई।

छत्तीसगढ़ में मजदूर आंदोलन

राजनांदगांव में ठाकुर प्यारेलाल सिंह स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रीय रूप से भूमिका निभा रहे थे। इन्होने मजदूरों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आंदोलन किया जो मजदूर आंदोलन के रूप में दिखाई पड़ने लगा। प्रथम आंदोलन 1920 में हुआ। इसका प्रमुख कारण मजदूरों से अधिक कार्य कराया जाना था। द्वितीय आंदोलन 1924 में हुआ। 1920 में बी.एन.सी मिल मजदूरों का ऐहितासिक हड़ताल प्यारलाल ठाकुर के अनुगाई में हुई, जो की 36 दिनों तक चली थी।

कंडेल नहर सत्याग्रह ( बारदोली या चम्पारण ) -यह सत्याग्रह धमतरी के कंडेल नामक ग्राम में हुआ था। सिचाई टैक्स के विरुद्ध यह सत्याग्रह हुई थी। अगस्त 1920 में कंडेल ग्राम को अनुबंधन के अंतर्गत लाने की दृष्टि से षड्यंत्र के तहत ग्राम में बिना मांग के अंग्रेजो के द्वारा जल प्रवाहित कर दिया गया। परन्तु गांव वाले ने अनुबंध करने से मन कर दिया। इसके चलते सरकार ने गांव वालो पर चोरी का आरोप लगाकर 4033 रूपए का जुर्माना लगा दिया। इसी कारण गांव की जनता ने विद्रोह प्रारम्भ कर दिया गया। इसी समय सुंदरलाल शर्मा ने गांधीजी को छत्तीसगढ़ आने का निवेदन किया। 20 दिसम्बर 1920 को गाँधी जी छत्तीसगढ़ आये। परन्तु इससे पूर्व ही अंग्रेजो ने टैक्स आरोपण को वापस ले लिया।

गाँधीजी का प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन

सुन्दरलाल शर्मा ने कंडेल नहर सत्याग्रह के सन्दर्भ में गांधीजी को छत्तीसगढ़ आने का निवेदन किया। उस समय गाँधी जी बंगाल दौरे में थे। सुंदरलाल शर्मा उन्हें आमंत्रित करने कलकत्ता गए और गाँधीजी ने छत्तीसगढ़ आने का निमत्रण को स्वीकार कर लिया।गाँधी जी 20 दिसम्बर 1920 को पंडित सुंदरलाल शर्मा के साथ रायपुर रेलवे स्टेशन में पहुंचे। उनके साथ खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मौलाना शौकत अली भी रायपुर आये थे। रायपुर पहुंचते ही कंडेल नहर सत्याग्रह में मिली सफलता के बारे में सुचना मिली। गाँधीजी ने रायपुर के गाँधीचौक में जनता को सम्बोधित किया और असहयोग आंदोलन के बारे में जानकारी दी। 21 दिसम्बर 1920 को गाँधीजी और मौलाना शौकत अली धमतरी पहुंचे थे। धमतरी नगर के मकई बंध चौक में उत्साही जनता ने इनका स्वागत किया। गाँधीजी के द्वारा जनता को सम्बोधित करने के लिए जानी हुसैन का बाड़ा तय किया गया था।

खिलाफत आंदोलन और छत्तीसगढ़

खिलाफत आंदोलन एक राष्ट्रीय आंदोलन था जिसका नेतृत्व मौलाना शौकत अली कर रहे थे। छत्तीसगढ़ में भी यह आंदोलन ने तुक पकड़ लिया था। इसे के चलते यंहा खिलाफत समिति का गठन किया गया। इस आंदोलन का मुख्य मकसद था मुसलमानो की हितो का रक्षा करना। 17 मार्च 1920 को रायपुर में एक आम सभा हुई जिसमे मुसलमानो के धार्मिक प्रमुख खलीफाओं के सम्मान की बात कही गयी।उस समय पंडित रविशंकर शुक्ल ने कहा था -” हम लोग हिन्दू और मुस्लमान नहीं रहे बल्कि सभी अर्थो में हम हिंदुस्तानी है ” ।

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