छत्तीसगढ़ का लोकनृत्य | Folk dance of CG

November 20, 2018

     लोकनृत्य

यंहा “लोक” का आशय छत्तीसगढ़ की जनता से है, और “नृत्य” का आशय जनता के द्वारा की जाने वाली पारम्परिक डांस है। यह प्रदेश लोकनृत्यो की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। यंहा की जनजातियों द्वारा की जाने वाले लोकनृत्य विश्व प्रशिद्ध है। आइए जानते है छत्तीसगढ़ के प्रमुख नृत्यों के बारे में –

सुआ नृत्य –

यह नृत्य छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय नृत्य है। सुआ नृत्य को गौरा नृत्य भी कहते है। इस नृत्य को महिलाये एवं किशोरिया करती है। यह नृत्य कुंवार माह में किया जाता है।

दीपावली के शुरू होने के कुछ दिन पहले से ही महिलाये अपनी-अपनी टोलिया बनाकर यह नृत्य प्रत्येक घरो में जा कर करती है। इस नृत्य को गोलाकार झुण्ड बनाकर ताली की थाप के साथ गीत गाकर किया जाता है।

गोलाकार झुण्ड के मध्य एक टोकरी, लाल कपडे से ढ़ककर रखी होती है जिसके चारो तरफ धान भरा रहता है। टोकरी के मध्य में मिट्टी के दो (सुआ) तोते रखा जाता है जो की भगवन शिव और पार्वती का प्रतिक है और इसके चारो ओर घूमकर नृत्य किया जाता है।

पंथी नृत्य –

पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज के द्वारा किया जाने वाला एक लोकप्रिय नृत्य है। इसमें पुरुष और महिलाये दोनों भाग लेती है। सतनाम समाज के संस्थापक गुरु घासीदास जी का चरित्र वर्णन इस पंथी नृत्य में किया जाता है।

जैतखाम की स्थापना करके उसके चारो ओर चक्कर लगते हुए यह नृत्य किया जाता है। पंथी नृत्य का प्रारम्भ देवी-देवताओ, गुरुघासीदास की स्तुति से किया जाता है | इस नृत्य में मुख्य वाद्य यंत्र मंदार एवं झांझ है |

राउत नृत्य –

राउत नृत्य को ‘गहिरा नृत्य’ या ‘राउत नाच’ भी कहा जाता है। यह नृत्य छत्तीसगढ़ के राउत जातियों के द्विरा किया जाता है। यह नृत्य पुरुष प्रधान सामूहिक नृत्य है।

इस नृत्य में भाग लेने वाले लोग का पहनावा बहुत ही आकर्षक होता है। सर में पगड़ी बांधकर उसके एक किनारे में मोर पंख लगाते है।

राउत ( यादव ) लोग टोलिया बनाकर घरो -घर जाकर धन देवता का चित्र बनाते है और साथ में पशुओं को सुहई बांधकर सभी के लिए मंगल कामना करते है।

इस नृत्य में गढ़वा बाजा, मोहरी, निशान, टिमकी आदि वाद्य यंत्र का प्रयोग करते है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रसिद्ध राउत नृत्य का आयोजन प्रतिवर्ष किया।

।। पढ़ने के लिए तहेदिल से धन्यवाद ।।

 

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