छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियाँ

October 23, 2018

छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियाँ एवं हिंदी अनुवाद

आईये दोस्तों जानते है कुछ ऐसे लोकोक्तियाँ जो छत्तीसगढ़ में बहुत प्रचलित है और जिससे लोगो को बहुत कुछ सीखने को मिलता है, छत्तीसगढ़ी भाषा में लोकोक्तियाँ को “हाना” कहते है–

धरम करे मां जउन होय हानि
तभू न छाड़य धरम के बानी।
धर्म के पथ पर चलने से अगर हानि हो तभी भी धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

कोईली अऊ कौआ बोली ले, चिन हाथे।
कोयल और कौआ, अपनी बोली से पहचान जाते है। अर्थात व्यक्ति अपने व्यवहार से पहचान जाते है।

पानी मां बस के मगर ले बैर।
पानी में रहकर मगरमच्छ से दुश्मनी मोर लेना। अर्थात सत्ताधारीयों से दुश्मनी मोर लेना।

अपन हाथ मां नागर धरे, वो हर जग मां खेती करे।
इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति खुद हल चलाता है, वही व्यक्ति अच्छा खेती कर सकता है।

कलजुग के लइका करै कछैरी, बुढ़वा जोतै नागर –
इसका अर्थ है कि कलियुग में लड़का आॅफिस में काम करने जाता है और उसका बूढ़ा बाप खेत मे हल चलाता रहता है।

जैसन बोही, तैसन लूही
इसका अर्थ है कि कर्म के अनुसार फल मिलता है।

पानी पीए छान के, गुरु बनावै जान के
पानी छानकर अगर नहीं पीया तो बीमारी होती है। उसी तरह किसी को अगर गुरु बनाओ तो पहले अच्छे से जान लो।

खेती रहिके परदेस मां खाय, तेखर जनम अकारथ जाय।
इसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति के पास खेती करने के लिए जमीन होते हुए भी पैसा कमाने हेतु परदेश जाता है उसका जन्म लेना ही बेकार है।

महानदी के महिमा, सिनाथ के झोल।
अरपा के बारु अऊ खारुन के सोर।
इसका अर्थ है कि महानदी की महिमा, शिवनाथ नदी की चौड़ाई, अरपा नदी का रेत और खारुन नदी के पानी का बहुत से स्रोत प्रसिद्ध है।

दहरा के मछरी अब्बर मोठ।
इसका अर्थ है कि गहरे पानी की जो मछली हमें मिल नहीं पाती, वह बड़ी मोटी लगती है। अर्थात जो चीज़ हमें मिल नहीं पाती, वह हमेशा लोभनीय लगती है।

राई के परवत, अउ परवत के राई।
एदे बूता कौन करे, डौकी के भाई।।
छोटी बात को बढ़ा चढ़ा कर कहने कि आदत साले (स्री के भाई) में ही होती हऐ।

का हरदी के जगमग, का टेसू के फूल।
का बदरी के छइहां, अऊ परदेसी के संग।।
हल्दी का रंग, टेसू फूल की लालिमा, बादल का छाँह और परदेशी का साथ – ये सब बहुत ही कम समय के लिए होता है। अच्छी समय बहुत कम समय के लिए होता है।

तेल फूल में लइका बढे, पानी से बाढे धान
खान पान में सगा कुटुम्ब, कर वैना बढे किसान
इसका अर्थ है की बच्चे का पालन पोषण अच्छा होगा तब बच्चा तंदरुस्त होगा। खेत में पानी अच्छा रहेगा तब धान अच्छा होगा और खाने पिने से कुटुंब बढ़ते है। ठीक इसी प्रकार किसान तभी तरक्की करेगा जब वह कर्मठ होगा।

बोवै कुसियार, त रहे हुसियार
जो किसान गन्ना बोता है, उसे बहुत ही होशियार रहना पड़ता है क्योंकि गन्ने को जितनी ज़रुरत है उतना ही पानी देना पड़ता है।

छत्तीसगढ़ के खेड़ा, मथुरा का पेड़ा
जिस तरह मथुरा के पेड़ा प्रसिद्ध है उसी तरह छत्तीसगढ़ के खेड़ा। खेड़ा एक प्रकार की सब्ज़ी है। हर जगह किसी न किसी कारन के लिए प्रसिद्ध है।

बड़े बाप के बेटी
धीव बिन खिचरी न खाय,
संगत पड़े भोलानाथ के
कंडा बिनत दिन जाय।
इसका अर्थ है सब दिन एक जैसा नहीं होता। जैसे अमीर व्यक्ति की बेटी जो धी के बिना खिचड़ी नहीं खाती थी, अगर उसकी शादी शिव जैसे व्यक्ति सो हो, तो उसे हर प्रकार का काम करना पड़ता है।
ररुहा ला भाते भात। जो भुखा है, उसे तो चारों ओर भात ही भात दिखता है। जो चीज़ हमें जरुरत है। वह चीज़ हमें चारों ओर दिखता है। अर्थात हम उसी के बारे में जो सोचते रहते है।

तोर गारी मोर कार के बारी।
इसका अर्थ कि जब किसी से मोहब्बत होता है। उसका हर चीज़ अच्छा लगता है। उसकी गाली भी अच्छी लगती है। जैसे कि कान की बाली अच्छी लगती है। गाली, कान की बाली जैसे है।

चार ठन बर्तन रइथे तिहां ठिक्की लगावे करथे।
जहाँ कई लोग इकट्ठे रहते है, वहाँं झगड़ा होना स्वाभाविक है। जैसे कुछ बर्तने एक साथ जहाँ रक्खी जाती, वहाँ एक दूसरे से टक्कर हो ही जाती है।

जेखर जइसे दाई ददा
तेखर तइसे लइका।
जेखर जैसे धर दुवार।
तेखर तइसे फरिका।
बच्चें अपने माता पिता जैसे होते है। जैसे मा पिता, वैसे ही बच्चें। ठीक उसी तरह, जिस तरह धर का दरवाज़ा धर के संदर्भ में ही बनती है।

कब बबा मरही त कब बरा खावो।
किसी के मृत्यु के पश्चात जब श्राद्ध होना है तो स्वादिष्ट भोजन बनती है। यहाँ इन्तज़ार किया जा रहा है कि कब बबा कि मृत्यु हो, और स्वादिष्ट भोजन खाने को मिले।

थूंके थूंक मां लडुवा बांधे।
लड्डू बनाना थूक के, इसका अर्थ है कि जिस तरह थूक के लड्डू नहीं बनते, उसी तरह कोई काम मेहनत के बिना नहीं होता।

खाके मूत सूते बाऊँ
काहे बैद बसावै गाऊँ।
यह हाना स्वास्थ के बारे में है और इससे पता चलता है कि लोग कितने ज्ञानी होते है। खाना खाने के बाद जो व्यक्ति पिशाब करता है और बायी करवट सोता है, वह व्यक्ति हमेशा निरोग रहता है। और निरोग रहने के कारण वैध की जरुरत ही नहीं होती।

बिहनियां उठि जे रोज नाहय
ओला देखि बैद पछताय।
जो व्यक्ति रोज़ नहाता है उसे देखकर बैद पछताता है क्योंकि रोज़ नहाने के कारण उसका स्वास्थ निरोग रहता है।

दाई मेरे घिरा बर
घिया मरे पिया बर।
माता अपनी बेटी के लिए चिन्ता कर रही है और चिन्ता से मर रही है। उधर बेटी अपने पति के लिए चिन्ता कर रही है।

जगत कहे भगत बइहा
भगत कहे जगत बइहा।
भक्त को देखकर संसार के लोग सोचते है कि यह व्यक्ति तो पागल है। और इधर भक्त संसार के लोगो को देखकर सोचता है कि ये लोग तो पागल है।

पढ़े बर गरंथ पोथी
कीरा परे तोर भीतरी कोठी।
बाहर से कुछ दिखते है, भीतर से कुछ और है। बड़े ग्रंथ पोथी पड़ते है पर अपनी कोठी के भीतर इस तरह गन्दा काम करता है कि शरीर में कीड़े पड़ जाते।

अपन मरे बिना सरग नई दिखै।
स्वर्ग तभी देख सकते है जब हम मरते है। अर्थात जब तक हम कार्य न करे तब तक फल नहीं पाते है।

जेला गोठियाय आवै
तेकर अंकरी बचाय
जेला गोठियाय नई आवय
तेखर चना धुनाय।
जो व्यक्ति बात करना जानता है, उसकी हर चीज़ बीक जाती है, निकृषृ अंकरी भी बीक जाती है पर जो व्यक्ति बात करना नहीं जानता, उसका चना भी सड़ जाता है, वह बेच नहीं पाता।

दाई देखे ठऊरी डऊकी देखे मोटरी।
यह पत्नी पर व्यंग है। माताऐं हमेशा अपने संतान का स्वास्थ के बारे में सोचती है। पत्नी पति का कमाई या धन के बारे में सोचती हैं।

जेखर घर डौकी सियान
तेखर मरे बिहान।
इस हाना का अर्थ है कि जिस घर में पत्नी चालाकी करती है, उस घर का पति अधमरा सा हो जाता है।

 Big Thank you !! please share this article

293total visits,1visits today

Leave a Reply:

Your email address will not be published. Required fields are marked *