छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारी आंदोलन

October 17, 2018

छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारीआंदोलन

छुई खदान जंगल सत्याग्रह

1938 में छुई खदान जंगल सत्याग्रह हुआ जिसके नेता थे समारू बरई। उस समय छुई खदान रियासत में कांग्रेस की स्थापना हुई थी। जिसका उद्देश्य जनता को सरकारी शोषण से बचाना था। जनता ने मिल कर वंहा जंगल सत्याग्रह आरम्भ किया था।

बदराटोला जंगल सत्याग्रह

21 जनवरी 1939 को बदराटोला नमक गांव से जंगल सत्याग्रह की शुरवात हुई। जिसके नेता रामधीन गोंड थे। इस आंदोलन में करीब 300 – 400 लोग शामिल हुए थे। इस सत्याग्रह को रोकने के लिए सरकार ने कई हथकंडे अपनाये। लोगो को गिरफ्तार किया गया। अहिंसावादी आंदोलन पर अंग्रेजो ने लाठिया बरसाई। कई लोग घायल हुए पर लोगो ने सत्याग्रह करना जारी रखा। जब अंग्रेज नाकाम हो रहे थे तो उन्होंने निहत्थे जनता पर गोलिया चलाई जिसके चलते इस आंदोलन के नेता रामधीन गोंड की मृत्यु हो गयी और कई लोग घायल हुए।

रायपुर षड़यंत्र केस

1942 में परसराम सोनी ने अंग्रेजो के खिलाफ एक बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी।परन्तु शिवनंदन ने अंग्रजो को यह बात बता दी और अंग्रजो ने परसराम सोनी को गिरफ्तार कर लिया। 7 साल की सजा हुई। 26 जून 1946 को मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल की कोशिस के बाद उन्हें छुड़वाया गया।

रायपुर डायनामाइट कांड

बिखल नारायण अग्रवाल ने कैदियों को रिहा करवाने के लिए रायपुर जेल की दिवार को डायनमाइट से उड़ाने की योजना बनाई थी। परन्तु योजना के चलते जेल के दिवार टूटी जरूर लेकिन कैदियों को रिहा नहीं करा पाए।

 

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