छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह 

October 17, 2018

यंहा जंगल सत्यग्राह होने का कारण था अंग्रेजो का वन कानून बनाना। उस समय छत्तीसगढ़ की अधिकांश आबादी खासकर के आदिवासियों की जीविका का साधन वन उत्पाद पर निर्भर था परन्तु अंग्रजो के द्वारा बनाई गयी वन निति से आदिवासियों के अधिकारों का हनन होने लगा और इसके विरोध में छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह का प्रारम्भ हुआ।

सिहावा नगरी जंगल सत्याग्रह

यह सत्याग्रह 1922 में हुआ था। पंडित सुंदरलाल शर्मा, छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले आदि इस जंगल सत्याग्रह के नायक थे। सिहावा नगरी जंगल सत्याग्रह छत्तीसगढ़ का प्रथम जंगल सत्याग्रह था। अंग्रेजो द्वारा वनो को आरक्षित घोषित करना ही इस सत्याग्रह का प्रमुख कारण था। लोगो ने आरक्षित वनो का उपयोग करके वन कानून का विरोध किया।

गट्टासिल्ली सत्याग्रह

अंग्रेजो द्वारा बनाये गए वन कानून स्थायी लोगो के लिए मुसीबत बनती गयी। धमतरी के सिहावा खंड के ठेमली गांव के वनरक्षित क्षेत्र में मवेशियों को घास चरने के अपराध में गट्टासिल्ली के कांजी हाउस में डाल दिया गया। इसी मवेशियों को छुड़वाने हेतु यह सत्याग्रह किया गया। यह सत्याग्रह सफल रही और मवेशियों को छोड़ दिया गया। नारायण राव मेघावाले, नाथू जगताप छोटे लाल श्रीवास्तव ने यह सत्याग्रह किया था।

रुद्री- नवागांव जंगल सत्याग्रह

वन कानून के विरोध में 22 अगस्त 1930 को बड़ी संख्या में सत्याग्रहियों ने नवागांव स्थित रुद्री वनविभाग की सुरक्षित घास को काट कर कानून का उल्लंघन करने का निर्णय लिया। इस कार्य को अंजाम देने वाले थे नारायण मेघावाले, जगताप आदि परन्तु जैसे ही यह सूचना अंग्रेजो को मिली उन्होंने सभी लीडर को गिरफ्तार कर लिया तथा वंहा धारा 144 लगा दिया। रुद्री पहुंची भीड़ पर अंग्रजो द्वारा गोली चलाई गयी जिसमे सिंधु कुमार नामक व्यक्ति मारा गया।

तमोरा जंगल सत्याग्रह -इसके लीडर थे यतियतन लाल। सत्याग्रहियों ने तमोरा नामक गांव से जंगल की ओर प्रस्थान की और सत्याग्रह की शुरुवात की। वंहा की बालिका दयावती ने रेंजर को थप्पड़ मार दिया था। जिसके कारण सत्याग्रह उग्र रूप धारण कर लिया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के समाप्ति के साथ ही यह सत्याग्रह भी समाप्ति हो गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन व छत्तीसगढ़

सविनय अवज्ञा आंदोलन गाँधीजी का दूसरा बड़ा आंदोलन था। छत्तीसगढ़ में भी इसका बहुत बड़ा असर पड़ा।सत्याग्रह के रूप में सवनीय अवज्ञा आंदोलन छत्तीसगढ़ में हुआ था। रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल ने सोडा और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलकर नमक बनाया और नमक कानून को तोडा। यतियतन ने तमोरा में, नाथू जगताप और नारायण मेघवाल ने धमतरी में, गट्टासिल्ली तथा रुद्री में जंगल सत्याग्रह किया। यंहा रायपुर में बलिराम ने वानर सेना गठित किया। वासुदेव देवरस ने बिलासपुर में आंदोलन किया।इस दौरान जुलुश निकले गए, हड़ताले हुई, विदेशी कपड़ो को जलाया गया। गाँधी- इरविन समझौता के साथ ही यह आंदोलन समाप्त हो गया।

गाँधी जी का द्वितीय छत्तीसगढ़ आगमन

22 नवम्बर 1933 को गाँधी जी दूसरी बार छत्तीसगढ़ आये थे। 23 नवम्बर को रायपुर के तत्कालीन विक्टोरिया गार्डन में स्वदेसी प्रदर्शन का उद्घाटन किया। गाँधीजी ने हरिजनों के उद्धार के लिए छत्तीसगढ़ में कई जगह भ्रमण किये। छत्तीसगढ़ में हरिजनों के उद्धार का कार्य 1917 से ही पंडित सुंदरलाल शर्मा ने प्रारम्भ कर दिया था। जिसे जानकर गांधीजी बहुत प्रसन्न हुए और गाँधी जी ने सुंदरलाल शर्मा को अपना गुरु मान लिया। रायपुर जिले में गांधीजी के प्रवास के दौरान पडित रामदयाल तिवारी उनसे प्रभावित हुआ और गाँधी मीमांस नमक ग्रन्थ लिखना प्रारम्भ कर दिया। रामदयाल तिवारी छत्तीसगढ़ के विद्यासागर कहे जाते है।

छत्तीसगढ़ में प्रथम निर्वाचन

1937 को यंहा पहली बार चुनाव हुआ। उस समय छत्तीसगढ़ मध्य प्रान्त और बरार का हिस्सा था। रायपुर से पंडित रविशंकर शुक्ल ,बिलासपुर से ई. राघवेंद्र राव दुर्ग से घनश्याम सिंह गुप्त निर्वाचित हुए। 4 जुलाई 1937 को मध्य प्रान्त के मुख्यमंत्री बी.जी.खरे बने और शिक्षा मंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल बने। कुछ कारनवश बी.जी.खरे ने त्यागपत्र दिया और 29 जुलाई 1937 को पंडित रविशंकर शुक्ल यंहा के मुख्यमंत्री बने।

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